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बिना बात के बडे बोल मुख सै नै निकलै
कहनी कहै और .........
ताकौ गंज न .............
इतनी सरलता व सहजता हम अपने गुरू जी सै मॉगै कि हमारे अंत:करण मै कोलाहल शांत हुय जाय
बिना बात के बडे बोल मुख सै नै निकलै जिन्है पूरो करन के लय हमारे भीतर और बाहर कोई संघर्ष नै होय
जाके बाहिर और .......
बाके भगत ........,...
बतलाया सै मीठा बोलै
बाके अंदर ............ डोलै
विचार करै सिर्फ दिखावे मै या लोकलाज के डर सै तौ हमारे अंदर और बाहर मै फर्क तौ नाय हुय रहो है कि हमनै सत के रहन के लय स्थान ही साफ नाय कर रखो है
बाके दरसे माफक ..........
कोई मोमदिली .......पावै
साध शीतल ...............
कोई भेदी ............. खोलै
भाव मै बदलाव की प्रार्थना आप सै करन सै हमारे अंदर और बाहर को द्वंद समाप्त हुय सकत है मोमदिली बननो है कठोरता सै मालिक बचामैंगे
हरफै हरफ ...........
तौ .............. दिलासा
विचार करै ग्यान कह रहो है हुरफ की तरह बोलन वाले की दिल आसा (दिलासा)मालिक लखत और पूरी करत है मालिक सै मॉगै वे बख्श देंगे
मालिक सबको भलो करियौ दाता सबके गुनाह माफ करियौ दाता सबकौ अपने चरणो मै स्थान दियौ
जिस दिन हमारी मोत होती है, हमारा पैसा बैंक में ही रह जाता है।
*
जब हम जिंदा होते हैं तो हमें लगता है कि हमारे पास खच॔ करने को पया॔प्त धन नहीं है।
*
जब हम चले जाते है तब भी बहुत सा धन बिना खच॔ हुये बच जाता है।
*
एक चीनी बादशाह की मोत हुई। वो अपनी विधवा के लिये बैंक में 1.9 मिलियन डालर छोड़ कर गया। विधवा ने जवान नोकर से शादी कर ली। उस नोकर ने कहा -
"मैं हमेशा सोचता था कि मैं अपने मालिक के लिये काम करता हूँ अब समझ आया कि वो हमेशा मेरे लिये काम करता था।"
सीख?
ज्यादा जरूरी है कि अधिक धन अज॔न कि बजाय अधिक जिया जाय।
• अच्छे व स्वस्थ शरीर के लिये प्रयास करिये।
• मँहगे फ़ोन के 70% फंक्शन अनोपयोगी रहते है।
• मँहगी कार की 70% गति का उपयोग नहीं हो पाता।
• आलीशान मकानो का 70% हिस्सा खाली रहता है।
• पूरी अलमारी के 70% कपड़े पड़े रहते हैं।
• पुरी जिंदगी की कमाई का 70% दूसरो के उपयोग के लिये छूट जाता है।
• 70% गुणो का उपयोग नहीं हो पाता
तो 30% का पूण॔ उपयोग कैसे हो
• स्वस्थ होने पर भी निरंतर चैक अप करायें।
• प्यासे न होने पर भी अधिक पानी पियें।
• जब भी संभव हो, अपना अहं त्यागें ।
• शक्तिशाली होने पर भी सरल रहेँ।
• धनी न होने पर भी परिपूण॔ रहें।
बेहतर जीवन जीयें !!!
💮💮💮💮
काबू में रखें - प्रार्थना के वक़्त अपने दिल को,
काबू में रखें - खाना खाते समय पेट को,
काबू में रखें - किसी के घर जाएं तो आँखों को,
काबू में रखें - महफ़िल मे जाएं तो ज़बान को,
काबू में रखें - पराया धन देखें तो लालच को,
💮💮💮
भूल जाएं - अपनी नेकियों को,
भूल जाएं - दूसरों की गलतियों को,
भूल जाएं - अतीत के कड़वे संस्मरणों को,
💮💮💮
छोड दें - दूसरों को नीचा दिखाना,
छोड दें - दूसरों की सफलता से जलना,
छोड दें - दूसरों के धन की चाह रखना,
छोड दें - दूसरों की चुगली करना,
छोड दें - दूसरों की सफलता पर दुखी होना,
💮💮💮💮
🌟 यदि आपके फ्रिज में खाना है, बदन पर कपड़े हैं, घर के ऊपर छत है और सोने के लिये जगह है,
तो दुनिया के 75% लोगों से ज्यादा धनी हैं
🌟 यदि आपके पर्स में पैसे हैं और आप कुछ बदलाव के लिये कही भी जा सकते हैं जहाँ आप जाना चाहते हैं
तो आप दुनिया के 18% धनी लोगों में शामिल हैं
🌟 यदि आप आज पूर्णतः स्वस्थ होकर जीवित हैं
तो आप उन लाखों लोगों की तुलना में खुशनसीब हैं जो इस हफ्ते जी भी न पायें
🌟 यदि आप मैसेज को वाकइ पढ़ सकते हैं और समझ सकते हैं
तो आप उन करोड़ों लोगों में खुशनसीब हैं जो देख नहीं सकते और पढ़ नहीं सकते
🌟 जीवन के मायने दुःखों की शिकायत करने में नहीं हैं
बल्कि हमारे निर्माता को धन्यवाद करने के अन्य हजारों कारणों
👉स्वचिंतन👈
ना तुम अपने आप को गले लगा सकते हो,
ना ही तुम अपने कंधे पर सर रखकर रो सकते हो।
एक दूसरे के लिये जीने का नाम ही जिंदगी है।
इसलिये वक़्त उन्हें भी दो जो तुम्हे चाहते है दिल से।
रिश्ते पैसो के मोहताज़ नहीं होते।
क्योकि कुछ रिश्ते मुनाफा नहीं देते
पर अमीर जरूर बना देते है।
जर्रे ज़र्रे मे आप की कार का नूर है ..
फिर बन्दे क्यों तुझको ग़ुरूर है ..
बन्द आँख का यह खेल है
दिख रहा और जो नहीं दिख रहा
सब उसका दस्तूर है ....
हम जो कुछ भी हैं वो हमने आज तक क्या सोचा इस बात का परिणाम है। यदि हम बुरी सोच के साथ बोलेंगे या काम करेंगे , तो हमें कष्ट ही मिलेगा है। यदि हम शुद्ध विचारों के साथ बोले या काम करे , तो परछाई की तरह ही प्रसन्नता हमारा साथ कभी नहीं छोडेगी।
यह मनुष्य देह हमको हमारे मालिक का बहुत बड़ा उपकार है
।।बदां अपने धनी नै धाव जिन थारी देह धरी ।।
यह मनुष्य देह हमको हमारे मालिक का बहुत बड़ा उपकार है । मौक़ा मालिक ने दिया है कि हम उनकी चीज़ ईमानदारी रखते हुये मालिक के जोग को समझते हुए मालिक से जोग लगाने के लिये उपाय करे तो जब हम उपाय करेगे तो आप धनी करन जोग करनी सौंप देते है और हर पल मदद भी करते है जिसको करने से मालिक दयालु अपना निज ज्ञान सौंप देते है और उबार लेते है ।
शब्द परख मन राखौ धीर । बाँह जो पकडै दास कबीर ।।
|| सतनाम ||
यह मनुष्य देह हमको हमारे मालिक का बहुत बड़ा उपकार है । मौक़ा मालिक ने दिया है कि हम उनकी चीज़ ईमानदारी रखते हुये मालिक के जोग को समझते हुए मालिक से जोग लगाने के लिये उपाय करे तो जब हम उपाय करेगे तो आप धनी करन जोग करनी सौंप देते है और हर पल मदद भी करते है जिसको करने से मालिक दयालु अपना निज ज्ञान सौंप देते है और उबार लेते है ।
शब्द परख मन राखौ धीर । बाँह जो पकडै दास कबीर ।।
|| सतनाम ||
एक राजमहल के द्वार पर बड़ी भीड़ लगी थी
एक राजमहल के द्वार पर बड़ी भीड़ लगी थी। किसी फकीर ने सम्राट से भिक्षा मांगी थी। सम्राट ने उससे कहा, जो भी चाहते हो, मांग लो। दिवस के प्रथम याचक की कोई भी इच्छा पूरी करने का उसका नियम था। उस फकीर ने अपने छोटे से भिक्षापात्र को आगे बढ़ाया और कहा, बस इसे स्वर्ण मुद्राओं से भर दें।
सम्राट ने सोचा इससे सरल बात और क्या हो सकती है! लेकिन जब उस भिक्षा पात्र में स्वर्ण मुद्राएं डाली गई, तो ज्ञात हुआ कि उसे भरना असंभव था। वह तो जादुई था।
जितनी अधिक मुद्राएं उसमें डाली गई, वह उतना ही अधिक खाली होता गया! सम्राट को दुखी देख वह फकीर बोला, न भर सकें तो वैसा कह दें। मैं खाली पात्र को ही लेकर चला जाऊंगा! ज्यादा से ज्यादा इतना ही होगा कि लोग कहेंगे कि सम्राट अपना वचन पूरा नहीं कर सके !
सम्राट ने अपना सारा खजाना खाली कर दिया, उसके पास जो कुछ भी था, सभी उस पात्र में डाल दिया गया, लेकिन अद्भुत पात्र न भरा, सो न भरा। तब उस सम्राट ने पूछा, भिक्षु, तुम्हारा पात्र साधारण नहीं है। उसे भरना मेरी सामर्थ्य से बाहर है।
क्या मैं पूछ सकता हूं कि इस अद्भुत पात्र का रहस्य क्या है? वह फकीर हंसने लगा और बोला, कोई विशेष रहस्य नहीं। यह पात्र मनुष्य के हृदय से बनाया गया है।
क्या आपको ज्ञात नहीं है कि 【मनुष्य का हृदय कभी भी भरा नहीं जा सकता? धन से, पद से, ज्ञान से- किसी से भी भरो, वह खाली ही रहेगा, क्योंकि इन चीजों से भरने के लिए वह बना ही नहीं है। इस सत्य को न जानने के कारण ही मनुष्य जितना पाता है, उतना ही दरिद्र होता जाता है। हृदय की इच्छाएं कुछ भी पाकर शांत नहीं होती हैं। क्यों? क्योंकि, हृदय तो परमात्मा को पाने के लिए बना है
~ ओशो
पेड कभी छाया या जीवन दायी अॉक्सीजन देने का अभिमान नही करता
फूल कभी सुगंध देने का अहंकार नही करता
फल कभी दूसरो के पेट भरने का घमंड नही करता
फिर हम क्यो हर छोटी सी बात पर मान की चाहना रखते है अहंकार करते है जैसे सब हम ही कर रहे हो
मालिक से मै मेटने की प्रार्थना हर पल करनी चाहिए
आठ पहर रटता रहै
जब जे मन नन्हा होय
गरद सरीखा हुय रहै
पार पहुचै सोय
मालिक सबको भलो करियौ
दाता सबके गुनाह माफ कर दियौ
दाता सबकौ अपने चरणो मै स्थान दियौ
अहंकार न करने की अच्छी उपमाएं देकर समझाया, बहुत बढिया।
.
एक प्रेमी भाई के बिचार :-
भाव से बिचार ,
बिचार से बोल
बोल से करम
करम से व्यवहार
व्यवहार से चरित्र ब
चरित्र से हमारा भाग्य बनता है
"हारना तब आवश्यक हो जाता है जब लङाई
अपनों से हो,
और,
जीतना तब आवश्यक हो जाता है जब लङाई
अपने आप से हो..."
बिचार करे ..........
हम कौन है ?? खोजते खोजते मालिक समझ मे देते है कि हम आत्मा है और इस आत्मा को शक्ति आप के शबद से मिल रही है और बह शक्ति हम बोल के द्वारा ख़र्च कर रहे है ।
बोल हम मालिक का समझ कर बोलते है या उस बोल को अपना समझकर - फ़ैसला यही पर है ....
यही पर खोट मिलती है ..... बोलने बाले हम ही होते है तो कहा है ...
खोटा बचन काहे कौ काढौ ।
सतगुर मिलै जुबा कौ साधौ ।।
बोल हम आप धनी की शक्ति समझकर दूसरों को सुख पहुँचाने की भावना से मालिक से माँगकर बोलेंगे तो कहा है ..
।। साध शीतल बानी बोलै ।।
- सब कुछ मालिक का है हम सब उनकी शक्ति से पोषण प्राप्त कर रहे है यह सच है अब जिस समय हम यह बात स्वीकार कर लेते है ,अब मालिक जो चाहे करबा दे ।।
न कुछ किया , न कर सका
न करन जोग शरीर ,
जो कुछ किया साहिब किया
मै कुछ कीया नही
काह कही जो मे किया तो
आप ही थे मुझ माही ।।
जो प्राणी के अन्दर एक स्वाँस लेने की भी ताक़त नही हे वह आज सब कुछ करने वाला बन कर बैठा है,
न इसने कुछ किया हे न यह कुछ कर सकता हे न ही इसके शरीर मे कोई भी छमता है कि कुछ कर सके जो कुछ यह कर भी रहा है उसमें भी उस मालिक की ही कार व्रत रही हे ओर वह ही करा रहे हे ।
जिनकि की कार कण- कण मे विराजमान है वह कही पर भी करने वाले नही बनते -
अब हम स्वमं विचार करे .......... हम क्या कर रहे है।
अच्छा काम करते रहो कोई सम्मान
करे या न करें !!!!
सूर्य उदय तब भी होता हैं जब करोडो
लोग सोये होते हैं !!!
सुप्रभात
किसी की मजबूरियाँ पे न हँसिये,
कोई मजबूरियाँ ख़रीद कर नहीं लाता..!
डरिये वक़्त की मार से,
बुरा वक़्त किसीको बताकर नही आता..!
अकल कितनी भी तेज ह़ो,
नसीब के बिना नही जित सकती..!
बिरबल अकलमंद होने के बावजूद,
कभी बादशाह नही बन सका...!!"
"ना तुम अपने आप को गले लगा सकते हो, ना ही तुम अपने कंधे पर सर रखकर रो सकते हो ! एक दूसरे के लिये जीने का नाम ही जिंदगी है! इसलिये वक़्त उन्हें दो जो तुम्हे चाहते हों दिल से! रिश्ते पैसो के मोहताज़ नहीं होते क्योकि कुछ रिश्ते मुनाफा नहीं देते पर जीवन अमीर जरूर बना देते है
सत की भक्ति मन और बुद्धि से परे है
सम्राट ने सोचा इससे सरल बात और क्या हो सकती है! लेकिन जब उस भिक्षा पात्र में स्वर्ण मुद्राएं डाली गई, तो ज्ञात हुआ कि उसे भरना असंभव था। वह तो जादुई था।
जितनी अधिक मुद्राएं उसमें डाली गई, वह उतना ही अधिक खाली होता गया! सम्राट को दुखी देख वह फकीर बोला, न भर सकें तो वैसा कह दें। मैं खाली पात्र को ही लेकर चला जाऊंगा! ज्यादा से ज्यादा इतना ही होगा कि लोग कहेंगे कि सम्राट अपना वचन पूरा नहीं कर सके !
सम्राट ने अपना सारा खजाना खाली कर दिया, उसके पास जो कुछ भी था, सभी उस पात्र में डाल दिया गया, लेकिन अद्भुत पात्र न भरा, सो न भरा। तब उस सम्राट ने पूछा, भिक्षु, तुम्हारा पात्र साधारण नहीं है। उसे भरना मेरी सामर्थ्य से बाहर है।
क्या मैं पूछ सकता हूं कि इस अद्भुत पात्र का रहस्य क्या है? वह फकीर हंसने लगा और बोला, कोई विशेष रहस्य नहीं। यह पात्र मनुष्य के हृदय से बनाया गया है।
क्या आपको ज्ञात नहीं है कि 【मनुष्य का हृदय कभी भी भरा नहीं जा सकता? धन से, पद से, ज्ञान से- किसी से भी भरो, वह खाली ही रहेगा, क्योंकि इन चीजों से भरने के लिए वह बना ही नहीं है। इस सत्य को न जानने के कारण ही मनुष्य जितना पाता है, उतना ही दरिद्र होता जाता है। हृदय की इच्छाएं कुछ भी पाकर शांत नहीं होती हैं। क्यों? क्योंकि, हृदय तो परमात्मा को पाने के लिए बना है
~ ओशो
पेड कभी छाया या जीवन दायी अॉक्सीजन देने का अभिमान नही करता
फूल कभी सुगंध देने का अहंकार नही करता
फल कभी दूसरो के पेट भरने का घमंड नही करता
फिर हम क्यो हर छोटी सी बात पर मान की चाहना रखते है अहंकार करते है जैसे सब हम ही कर रहे हो
मालिक से मै मेटने की प्रार्थना हर पल करनी चाहिए
आठ पहर रटता रहै
जब जे मन नन्हा होय
गरद सरीखा हुय रहै
पार पहुचै सोय
मालिक सबको भलो करियौ
दाता सबके गुनाह माफ कर दियौ
दाता सबकौ अपने चरणो मै स्थान दियौ
अहंकार न करने की अच्छी उपमाएं देकर समझाया, बहुत बढिया।
.
एक प्रेमी भाई के बिचार :-
भाव से बिचार ,
बिचार से बोल
बोल से करम
करम से व्यवहार
व्यवहार से चरित्र ब
चरित्र से हमारा भाग्य बनता है
"हारना तब आवश्यक हो जाता है जब लङाई
अपनों से हो,
और,
जीतना तब आवश्यक हो जाता है जब लङाई
अपने आप से हो..."
बिचार करे ..........
हम कौन है ?? खोजते खोजते मालिक समझ मे देते है कि हम आत्मा है और इस आत्मा को शक्ति आप के शबद से मिल रही है और बह शक्ति हम बोल के द्वारा ख़र्च कर रहे है ।
बोल हम मालिक का समझ कर बोलते है या उस बोल को अपना समझकर - फ़ैसला यही पर है ....
यही पर खोट मिलती है ..... बोलने बाले हम ही होते है तो कहा है ...
खोटा बचन काहे कौ काढौ ।
सतगुर मिलै जुबा कौ साधौ ।।
बोल हम आप धनी की शक्ति समझकर दूसरों को सुख पहुँचाने की भावना से मालिक से माँगकर बोलेंगे तो कहा है ..
।। साध शीतल बानी बोलै ।।
- सब कुछ मालिक का है हम सब उनकी शक्ति से पोषण प्राप्त कर रहे है यह सच है अब जिस समय हम यह बात स्वीकार कर लेते है ,अब मालिक जो चाहे करबा दे ।।
न कुछ किया , न कर सका
न करन जोग शरीर ,
जो कुछ किया साहिब किया
मै कुछ कीया नही
काह कही जो मे किया तो
आप ही थे मुझ माही ।।
जो प्राणी के अन्दर एक स्वाँस लेने की भी ताक़त नही हे वह आज सब कुछ करने वाला बन कर बैठा है,
न इसने कुछ किया हे न यह कुछ कर सकता हे न ही इसके शरीर मे कोई भी छमता है कि कुछ कर सके जो कुछ यह कर भी रहा है उसमें भी उस मालिक की ही कार व्रत रही हे ओर वह ही करा रहे हे ।
जिनकि की कार कण- कण मे विराजमान है वह कही पर भी करने वाले नही बनते -
अब हम स्वमं विचार करे .......... हम क्या कर रहे है।
अच्छा काम करते रहो कोई सम्मान
करे या न करें !!!!
सूर्य उदय तब भी होता हैं जब करोडो
लोग सोये होते हैं !!!
सुप्रभात
किसी की मजबूरियाँ पे न हँसिये,
कोई मजबूरियाँ ख़रीद कर नहीं लाता..!
डरिये वक़्त की मार से,
बुरा वक़्त किसीको बताकर नही आता..!
अकल कितनी भी तेज ह़ो,
नसीब के बिना नही जित सकती..!
बिरबल अकलमंद होने के बावजूद,
कभी बादशाह नही बन सका...!!"
"ना तुम अपने आप को गले लगा सकते हो, ना ही तुम अपने कंधे पर सर रखकर रो सकते हो ! एक दूसरे के लिये जीने का नाम ही जिंदगी है! इसलिये वक़्त उन्हें दो जो तुम्हे चाहते हों दिल से! रिश्ते पैसो के मोहताज़ नहीं होते क्योकि कुछ रिश्ते मुनाफा नहीं देते पर जीवन अमीर जरूर बना देते है
सत की भक्ति मन और बुद्धि से परे है
रिजक मौत अबगत्त के सहारे
जीवन और मरत्यु ब रिजक ( भोजन ) तीनों हमारे हाथ मे नहीं । कितने जन्म हम ले चुके और कितनी बार हमारी मरत्यु हुई हम नहीं जानते । कहाँ से आए है और अगला ठिकाना कहाँ होगा नहीं मालूम ........ अनगिनत जन्म और मरत्यु से हम गुज़र चुके है । मरता है केबल शरीर आत्मा मिटती नहीं । बार बार मालिक मौक़ा देते है ......
।सत्तनाम जाने बिना कभी मुकत नहीं होय ।।
आप धनी ने नाम बताया "सत्तनाम " बह भी अमर है और मालिक की करपा से जो भी प्रानी सत्तनाम
से सुरत लगाने का प्रयास करता है तो मालिक उसको सच्ची सीख सुनाते है सींख सुनकर जो प्रानी सीख पर चलता है मालिक उस प्रानी के बोले हुये बोल भी अमर कर देते है और अमरलोक पहुँचा देते है बार बार जन्म मरत्यु का चक्र समाप्त कर देते है ।
इसलिये हमारे सबके बडे साधो ने सतनाम से सुरत लगाने का उपाय किया और मालिक के हवाले अपने को स्वय को सौंपकर बैठते थे ।
।सत्तनाम जाने बिना कभी मुकत नहीं होय ।।
आप धनी ने नाम बताया "सत्तनाम " बह भी अमर है और मालिक की करपा से जो भी प्रानी सत्तनाम
से सुरत लगाने का प्रयास करता है तो मालिक उसको सच्ची सीख सुनाते है सींख सुनकर जो प्रानी सीख पर चलता है मालिक उस प्रानी के बोले हुये बोल भी अमर कर देते है और अमरलोक पहुँचा देते है बार बार जन्म मरत्यु का चक्र समाप्त कर देते है ।
इसलिये हमारे सबके बडे साधो ने सतनाम से सुरत लगाने का उपाय किया और मालिक के हवाले अपने को स्वय को सौंपकर बैठते थे ।
शब्दों के दांत नहीं होते है
एक ने बहुत ही सुंदर पंक्तियां भेजी है, फारवर्ड करने से खुद को रोक नहीं पाया ....
शब्दों के दांत नहीं होते है लेकिन शब्द जब काटते है तो दर्द बहुत होता है और
कभी कभी घाव इतने गहरे हो जाते है की जीवन समाप्त हो जाता है परन्तु घाव नहीं भरते.............
इसलिए जीवन में जब भी बोलो मीठा बोलो मधुर बोलों
'शब्द' 'शब्द' सब कोई कहे,'शब्द' के हाथ न पांव;
एक 'शब्द' 'औषधि" करे,और एक 'शब्द' करे 'सौ' 'घाव"...!
"जो 'भाग्य' में है वह भाग कर आएगा..,जो नहीं है वह आकर भी भाग 'जाएगा"..!
प्रभू' को भी पसंद नहीं 'सख्ती' 'बयान' में,
इसी लिए 'हड्डी' नहीं दी, 'जबान' में...! जब भी अपनी शख्शियत पर अहंकार हो,
एक फेरा शमशान का जरुर लगा लेना।
और....
जब भी अपने परमात्मा से प्यार हो, किसी भूखे को अपने हाथों से खिला देना।
जब भी अपनी ताक़त पर गुरुर हो,एक फेरा वृद्धा आश्रम का लगा लेना।
और….
जब भी आपका सिर श्रद्धा से झुका हो, अपने माँ बाप के पैर जरूर दबा देना।
जीभ जन्म से होती है और मृत्यु तक रहती है क्योकि वो कोमल होती है.
दाँत जन्म के बाद में आते है और मृत्यु से पहले चले जाते हैं... क्योकि वो कठोर होते है।
छोटा बनके रहोगे तो मिलेगी हर बड़ी रहमत...
बड़ा होने पर तो माँ भी गोद से उतार देती है..
किस्मत और पत्नी भले ही परेशान करती है लेकिन\ जब साथ देती हैं तो ज़िन्दगी बदल देती हैं.।।
"प्रेम चाहिये तो समर्पण खर्च करना होगा।
विश्वास चाहिये तो निष्ठा खर्च करनी होगी।
साथ चाहिये तो समय खर्च करना होगा।
किसने कहा रिश्ते मुफ्त मिलते हैं ।
मुफ्त तो हवा भी नहीं मिलती ।
एक साँस भी तब आती है,
जब एक साँस छोड़ी जाती है!!"
''इंसान ने वक़्त से पूछा...
"मै हार क्यूं जाता हूँ ?"
वक़्त ने कहा..
धूप हो या छाँव हो,
काली रात हो या बरसात हो,
चाहे कितने भी बुरे हालात हो,
मै हर वक़्त चलता रहता हूँ,
इसीलिये मैं जीत जाता हूँ,
तू भी मेरे साथ चल,
कभी नहीं हारेगा....
Sadh Suresh Rohat:
शब्दों के दांत नहीं होते है लेकिन शब्द जब काटते है तो दर्द बहुत होता है और
कभी कभी घाव इतने गहरे हो जाते है की जीवन समाप्त हो जाता है परन्तु घाव नहीं भरते.............
इसलिए जीवन में जब भी बोलो मीठा बोलो मधुर बोलों
'शब्द' 'शब्द' सब कोई कहे,'शब्द' के हाथ न पांव;
एक 'शब्द' 'औषधि" करे,और एक 'शब्द' करे 'सौ' 'घाव"...!
"जो 'भाग्य' में है वह भाग कर आएगा..,जो नहीं है वह आकर भी भाग 'जाएगा"..!
प्रभू' को भी पसंद नहीं 'सख्ती' 'बयान' में,
इसी लिए 'हड्डी' नहीं दी, 'जबान' में...! जब भी अपनी शख्शियत पर अहंकार हो,
एक फेरा शमशान का जरुर लगा लेना।
और....
जब भी अपने परमात्मा से प्यार हो, किसी भूखे को अपने हाथों से खिला देना।
जब भी अपनी ताक़त पर गुरुर हो,एक फेरा वृद्धा आश्रम का लगा लेना।
और….
जब भी आपका सिर श्रद्धा से झुका हो, अपने माँ बाप के पैर जरूर दबा देना।
जीभ जन्म से होती है और मृत्यु तक रहती है क्योकि वो कोमल होती है.
दाँत जन्म के बाद में आते है और मृत्यु से पहले चले जाते हैं... क्योकि वो कठोर होते है।
छोटा बनके रहोगे तो मिलेगी हर बड़ी रहमत...
बड़ा होने पर तो माँ भी गोद से उतार देती है..
किस्मत और पत्नी भले ही परेशान करती है लेकिन\ जब साथ देती हैं तो ज़िन्दगी बदल देती हैं.।।
"प्रेम चाहिये तो समर्पण खर्च करना होगा।
विश्वास चाहिये तो निष्ठा खर्च करनी होगी।
साथ चाहिये तो समय खर्च करना होगा।
किसने कहा रिश्ते मुफ्त मिलते हैं ।
मुफ्त तो हवा भी नहीं मिलती ।
एक साँस भी तब आती है,
जब एक साँस छोड़ी जाती है!!"
''इंसान ने वक़्त से पूछा...
"मै हार क्यूं जाता हूँ ?"
वक़्त ने कहा..
धूप हो या छाँव हो,
काली रात हो या बरसात हो,
चाहे कितने भी बुरे हालात हो,
मै हर वक़्त चलता रहता हूँ,
इसीलिये मैं जीत जाता हूँ,
तू भी मेरे साथ चल,
कभी नहीं हारेगा....
Sadh Suresh Rohat:
रिश्ते चाहे कितने ही बुरे हो,उन्हें तोडना मत
आज के 3 उत्तम विचार
रिश्ते चाहे कितने ही बुरे हो,उन्हें तोडना मत क्योकि पानी चाहे कितना भी गंदा हो,अगर प्यास नहीं बुझा सकता पर आग तो बुझा सकता है।
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एक छोटी सी चिंटी आपकेबी पैर को काट सकती है,पर आप उसके पैर को नहीं काट सकते ! इसलिए जीवन में किसी को छोटा ना समझे ! क्योकि वह जो कर सकता ,शायद आप ना कर पाये !!
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जब कुछ सेकण्ड की मुस्कराहट से तस्वीर अच्छी आ सकती है,तो हमेशा मुस्करा के जीने से जिन्दगी अच्छी क्यों नहीं हो सकती
Sadh Suresh Rohat
रिश्ते चाहे कितने ही बुरे हो,उन्हें तोडना मत क्योकि पानी चाहे कितना भी गंदा हो,अगर प्यास नहीं बुझा सकता पर आग तो बुझा सकता है।
------------------------
एक छोटी सी चिंटी आपकेबी पैर को काट सकती है,पर आप उसके पैर को नहीं काट सकते ! इसलिए जीवन में किसी को छोटा ना समझे ! क्योकि वह जो कर सकता ,शायद आप ना कर पाये !!
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जब कुछ सेकण्ड की मुस्कराहट से तस्वीर अच्छी आ सकती है,तो हमेशा मुस्करा के जीने से जिन्दगी अच्छी क्यों नहीं हो सकती
Sadh Suresh Rohat
वह दिन कभी ना आये,
सतनाम सतनाम
सत सत कहियै जाय विध राखै गुरू ताय विध रहियै
धन्य हो दाता आपनै अपार सुख दै है
हर प्राणी की मै मेट कै आप के चरणन मै चित्त लगाय देऔ
मालिक सबको भलो करियौ मालिक सबके गुनाह माफ़ करियौ
मालिक सबकौ अपने चरणो मे स्थान दियौ
एक विचार-:
वह दिन कभी ना आये, जब हद से ज्यादा अभिमान हो जाये...बस इतना ही नीचे रखना मेरे मालिक मुझको कि..हर दिल दुआ देने को मजबूर हो जाये..!!
सत सत कहियै जाय विध राखै गुरू ताय विध रहियै
धन्य हो दाता आपनै अपार सुख दै है
हर प्राणी की मै मेट कै आप के चरणन मै चित्त लगाय देऔ
मालिक सबको भलो करियौ मालिक सबके गुनाह माफ़ करियौ
मालिक सबकौ अपने चरणो मे स्थान दियौ
एक विचार-:
वह दिन कभी ना आये, जब हद से ज्यादा अभिमान हो जाये...बस इतना ही नीचे रखना मेरे मालिक मुझको कि..हर दिल दुआ देने को मजबूर हो जाये..!!
भाव सिद्ध से हमारी राह बनती है
भाव :: हमारे भाव हर समय कुछ न कुछ बन रहे है उन भाव का शोधन बहुत ही आवश्यक है ।
भाव सिद्ध से हमारी राह बनती है ।
भाव सिद्ध से ब्रह्मा गाय हो गए , मरत्यु नहीं हुई जीवित रहते हुए देह बदल गयी ।
संतो ने अपने भाव मालिक से बदलबा लिए ।
भाव मे जितनी अधिक तड़प होगी मालिक के चरनो के लिये उतनी शीघ्रता से सिद्ध मालिक कर देते है
हमारे सच्चे भाव मालिक से छुपे नहीं है बे दाता मालिक इतने दया के भंडार है कि हमारे ग़लत भाव जब बनत है तो संकेत देते है परनतु हम अनसुना कर कष्ट पाते है ।
हम अपने भाव मालिक को सौंप दे कि दाता आप सम्हाल कर दो , हम अनजान है हमारी सच्चे भाव और अरदास को मालिक दाता लख लेंगे और सुचेती ब चेतना दे देगे जिससे हमारे भाव शुद्ध ब सच्चे हो सके ।
भाव मे मालिक अपना ज्ञान धयान सौंप देते हे जिससे खिमा और खिमत दया हर समय दाता ठहरा देते है
देह केबल एक बाहन है मालिक से मिलने के लिये
देह केबल एक बाहन है मालिक से मिलने के लिये
आत्मा इस बाहन मे बैठी है । भाव तलब तड़प देखकर मालिक अपना सम्बन्ध इस आत्मा से जोड़ देते है
सबसे प्रेम करो मालिक दाता की मैहर हम पर हमेसा बरसती रहेगी
👉 गंगा में डुबकी लगाकर,तीर्थ किए हज़ार। इनसे क्या होगा,अगर बदले नहीँ विचार।
👉 इस दुनियाँ के हर शख्स को नफरत है "झूठ" से..मैं परेशान हूँ
ये सोचकर, कि फिर ये "झूठ" बोलता कौन है"।
👉 "निंदा "तो उसी की होती है जो"जिंदा" है।
मरे हुए कि तो बस तारीफ ही होती हैं।
👉 महसूस जब हुआ कि सारा शहर, मुझसे जलने लगा है,
तब समझ आ गया कि अपना नाम भी, चलने लगा है”…
👉 सदा उनके कर्जदार रहिये जो आपके लिए कभी खुद का वक्त नहीं देखता है, और
सदा उनसे वफ़ादार रहिये जो व्यस्त होने के बावजूद भी आपके लिए वक़्त निकालता है।
👉 मोक्ष का एक ही मार्ग है। और वह बिल्कुल सीधा ही है।
अब मुशकिल उन्हें होती है। जिनकी चाल ही टेड़ी है।
👉 हम जब दिन की शुरुआत करते है, तब लगता है की, पैसा ही जीवन है ..
लेकिन, जब शाम को लौट कर घर आते है, तब लगता है, शान्ति ही जीवन है ।
👉 फलदार पेड़ और गुणवान व्यक्ति ही झुकते है , सुखा पेड़ और मुर्ख व्यक्ति कभी नहीं झुकते ।
कदर किरदार की होती है… वरना…कद में तो साया भी इंसान से बड़ा होता है.......
👉 पानी मर्यादा तोड़े तो "विनाश" "और" वाणी मर्यादा तोड़े तो "सर्वनाश"
इसलिए हमेशा अपनी वाणी पर संयम रखो।
सभी की उपस्थिति बहूत ही सरहानीय होगी
हमारे जीवन मे इस संसार की वस्तु पाना मुश्किल है फिर भी हम पा लेते हैं और कठिन चुनौती भी पर जो काम बहुत आसान है मालिक को पाना वे हमे भारी लगता है क्योंकि हमने भाव नही वनाया हमे सच्चे मन से भाव बनाने की देरी है बाकी मालिक हमारे भाव पूरे कर देगे पर हमारे मन मे हमारे भाव मे मालिक से मिलने की तड़प होनी चाहिए
सतनाम
बंदगी के बिना हम मिरतक के समान हैं
सतनाम
रविनसन साध
बहुत जोग बात है समझने के लिये
आप की करपा दाता अवगत एक ।।
दिलौ के मालिक जे बानक सब तेरे ।।
दाता हर पल प्रत्येक क्षण सम्पूर्ण सरषटि पर किसी न किसी रूप मे सभी को दे रहे है।
बह हर पल स्वाँस देकर हमको ज़ीबित रखे हुये है ब हमारी पल पल की रक्षा सुरक्षा कवच बनाकर करते है बग़ैर आपकी करपा से हम एक पल भी इस मृत्युलोक में रह नहीं सकते है
बह दाता अपनी बनाई हर प्रति को दया से सींच रहे ब अदृश्य हाथो से पाल रहै है
मन इस करपा पर ग़ौर कर –
अवगत सा और दूजा न कोई
बह प्रतिपाल सकल सै न्यारा ।
यदि हम सच्चे भाव से आपकी करपा महसूस करने की माँग करे दाता अवश्य देंगे और उसी से हमारा बिराट अहं का क़िला गिरेगा
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